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Thursday, October 09, 2008

"रियालिटी शो" की "वास्तविकता"

'रियालिटी शो' जैसे कि शब्द से ही पता चलता है, कि 'रियल का शो' या 'वास्तविक शो' ! आजकल रियालिटी शो एक फैशन सा बन गया है! छोटे परदे यानि टी वी चैनलों जैसे - 9X , STAR ONE , SONY , NDTV Imegin, और MTV पर एक से बढ़कर एक रियाल्टी शो दिखाए जा रहे है! परन्तु क्या इन रियालिटी शो में पूरी तरह से वास्तविकता दिखाई जा रही है?

जहाँ तक कि सलमान खान का 'दस का दम' और शाहरुख़ खान का 'क्या आप पांचवी पास से तेज़ है' , का सवाल है! तो इन शो में सवालों के सही जवाब देने पर इनाम कि राशिः दी जाती है! लेकिन इसके अलावा कई संगीत और डांस की प्रतिस्पर्धाओ के शो चलाये जा रहे है! जैसे - 'ज़रा नच के दिखा' , 'माहि वे' , 'एक से बढ़कर एक' ! परन्तु क्या इन रियालिटी शो में पूरी तरह से रियालिटी है?

क्योकि इन शो में कलाकारों को उनकी प्रतिभा के अनुसार नही , अपितु जनता के SMS वोटो के द्वारा जिताया जा रहा है! इन रियालिटी शो में जब तीन जज निर्णय करने के लिए बैठे होते है, तो उनका निर्णय ही अन्तिम और सर्वेमान्य होना चाहिए! फ़िर SMS वोटिंग की क्या ज़रूरत ? और यदि जनता के SMS वोटिंग के आधार पर कलाकारों को जिताया जा रहा है, तो फ़िर जज क्यों बैठे है?

चूँकि वास्तविकता कुछ और है..... इसलिए रियालिटी शो में जनता द्वारा किए गए SMS वोटिंग से ही किसी को भी विजयी किया जा सकता है! फ़िर चाहे उसमे प्रतिभा हो या न हो.... और एक प्रतिभावान व्यक्ति उसमे पराजित हो जाता है! क्योकि उसको ज़्यादा वोट नही मिल पाते! लेकिन हमारे भारत की जनता इतनी सीधी है, कि वो सिर्फ़ भावनाओं में बहकर और कलाकारों के बाहरी दिखावे से प्रभावित होकर ग़लत निर्णय ले लेती है! जिसके कारण प्रतिभावान व्यक्ति को पराजित न होते हुए भी पराजय का सामना करना पड़ता है!

इसलिए कलाकारों के रिश्तेदार , यार - दोस्त अपने कलाकार को जिताने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा SMS वोटिंग करते है! और रिश्तेदारो , यार - दोस्तों की इस सोच का फायदा उठाकर मोबाइल कम्युनिकेशन कम्पनियाँ , ( जैसे - AIRTEL , IDEA , VODAFONE , TATA , BSNL आदि ) , इन SMS का 3 रुपए से लेकर 6 रुपए तक चार्ज कर रही है! इस प्रकार सीधी - साधी जनता के पैसो से ही कम्पनियाँ कलाकारों को इनाम बाँट रही है!

किंतु MTV चैनल पर दिखाये जाने वाले रियालिटी शो 'MTV रोडीज़' की तो रियालिटी ही कुछ अलग ही तरह की है! इस शो में कलाकारों से कर्तव्य ( अशलील हरक़ते ) करायी जाती है! जिस से समाज में अश्लीलता फैलने का खतरा बढ़ रह है! क्या ये सब वास्तव में हो रहा है? या फ़िर एक सोचा समझा प्लान है?

इसी तरह से 9X चैनल पर प्रसारित होने वाले रियालिटी शो 'टिकट टू बॉलीवुड' और BINDAAS चैनल पर प्रसारित होने वाले रियालिटी शो 'दादागिरी' में कलाकारों और होस्ट एक - दूसरे के साथ गाली - गलौच से बातें करते हुए नज़र आयेगे , और साथ में मार - पीट भी......क्या ये सब वास्तव में होता है? क्या यही रियालिटी है?

Thursday, August 28, 2008

क्या राजनेताओं के आय-व्यय का ब्यौरा जनता के सामने प्रदर्शित होना चाहिए?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है. चूंकि देश की जनता टैक्स देती है उन्हें इस बात को जानने का पूरा अधिकार है कि उनके पैसा का राज्य सरकार या केंद्र सरकार क्या कर रही है. इसलिए राजनीतिक दलों के आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक होना चाहिए.